विज्ञान और मिट्टी का संगम: उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में ‘संसार ग्रीन’ के संस्थापक राजीव सिंह सम्मानित
पूर्वी भारत में टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) पर हो रही चर्चा एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। हाल ही में, उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी, रांची में ‘संसार ग्रीन’ और ‘हरित संसार’ के संस्थापक राजीव सिंह को आधिकारिक तौर पर सम्मानित किया गया। जैविक उत्पादों, मिट्टी के संरक्षण और किसानों के सशक्तिकरण में उनके अग्रणी कार्यों के लिए उन्हें यह सम्मान मिला। विश्वविद्यालय के नेतृत्व के साथ उनकी मुलाकात में झारखंड में टिकाऊ खेती के लिए भविष्य की रणनीति पर गहराई से विचार-विमर्श किया गया। 🌱
यह बैठक एक महत्वपूर्ण सच्चाई को उजागर करती है: जैविक खेती को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना काफी नहीं है—इसके लिए आधुनिक कृषि विज्ञान, सूक्ष्मजीव जैव-प्रौद्योगिकी (Microbial Biotechnology) और सुव्यवस्थित सप्लाई चेन को एकीकृत करने की अत्यंत आवश्यकता है।
1. मिट्टी का विज्ञान: स्थानीय समाधान क्यों आवश्यक हैं?
झारखंड की प्राकृतिक जलवायु और मिट्टी की विविधता जैविक कृषि के लिए एक आदर्श आधार प्रदान करती है। हालांकि, खेती में “एक ही तरीका सब पर लागू” (Blanket approach) करने की नीति अक्सर विफल हो जाती है।
सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि टिकाऊ खेती तब सफल होती है जब कृषि इनपुट्स को विशिष्ट स्थानीय मिट्टी के अनुरूप तैयार किया जाता है। वैज्ञानिक मृदा परीक्षण (Soil testing) के माध्यम से, किसान सटीक नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम और सूक्ष्म पोषक तत्वों की जरूरतों की पहचान कर सकते हैं—जिससे सामान्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग के बजाय, लक्ष्य-आधारित और लागत-प्रभावी बायो-उत्पादों का उपयोग संभव हो पाता है।
2. शोध-आधारित जैविक समाधान (Research-Driven Organic Solutions)
संसार ग्रीन वैज्ञानिक सटीकता और व्यावहारिक क्रियान्वयन पर केंद्रित एक ढांचा तैयार कर रहा है:
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कस्टमाइज़्ड माइक्रो-इनपुट्स: मिट्टी की जैविक क्षमता को प्राकृतिक रूप से बहाल करने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट बायो-इनपुट्स और सूक्ष्मजीव स्ट्रेन (Microbial strains) तैयार करना।
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सटीक सलाह (Precision Advisory): फसल-विशिष्ट मार्गदर्शन के साथ मिट्टी का परीक्षण, जिससे पैदावार में अधिक स्थिरता आ सके।
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बाजार तक सीधी पहुंच (End-to-End Market Access): ग्रामीण उत्पादकों और शहरी खरीदारों के बीच सीधा संपर्क बनाना ताकि किसानों की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित हो सके।
इसके पूरक के रूप में, हरित संसार अभियान छात्रों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों को वृक्षारोपण और संरक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जवाबदेह बनाने का कार्य कर रहा है।
3. कृषि को आजीविका और रोजगार के इंजन में बदलना
इस संवाद का एक प्रमुख विषय खेती के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका था। जैविक खेती अब केवल एक पारंपरिक अभ्यास नहीं है—यह ग्रामीण उद्यमिता (Rural Entrepreneurship) के लिए एक उभरता हुआ नया क्षेत्र है।
झारखंड में युवा नवप्रवर्तकों (Innovators) के लिए विकास के प्रमुख अवसर शामिल हैं:
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स्थानीय बायो-फर्टिलाइजर और बायो-इनपुट उत्पादन इकाइयां।
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मूल्य संवर्धन (Value-addition), कृषि प्रसंस्करण (Processing) और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग उद्यम।
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एग्री-टेक (Agri-tech) सेवाएं, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट फार्मिंग स्टार्टअप्स।

संसार ग्रीन एवं हरित संसार के संस्थापक राजीव सिंह को उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी, रांची में सम्मानित किया गया। संवाद में झारखंड की मिट्टी के अनुरूप जैविक समाधान, आधुनिक कृषि विज्ञान, किसान सशक्तिकरण और “मिट्टी से मंडी तक” मॉडल पर विशेष चर्चा हुई।
4. “खेत से मंडी तक” (From Soil to Mandi)
उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी से मिले सम्मान पर विचार करते हुए, राजीव सिंह ने अपने मुख्य विजन पर प्रकाश डाला:
“यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं है; बल्कि यह मुझे अधिक जिम्मेदारी और नई प्रेरणा देता है। मेरा सपना है कि झारखंड के किसान अपनी मिट्टी की वास्तविक क्षमता को समझें और विज्ञान, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक आत्मनिर्भर और समृद्ध बनें।”
“खेत से मंडी तक” का यह ढांचा कृषि प्रक्रिया के हर चरण को जोड़ता है—जिसमें प्रारंभिक वैज्ञानिक मूल्यांकन, स्थानीय इनपुट आपूर्ति, किसानों का व्यावहारिक प्रशिक्षण और बाजार तक सुव्यवस्थित पहुंच को एक ही इकोसिस्टम (Ecosystem) में शामिल किया गया है।
आगे की राह (The Path Ahead)
झारखंड में टिकाऊ कृषि का मजबूत भविष्य बनाने के लिए अकादमिक शोधकर्ताओं, उद्यमियों, नीति निर्माताओं और स्थानीय कृषक समुदायों के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता है। विज्ञान को सीधे मिट्टी और खेतों तक पहुंचाकर, झारखंड पूरे भारत में जैविक खेती के लिए एक मिसाल (Benchmark) कायम कर सकता है।
उष्णजोशी भरे आतिथ्य, सम्मान और इस ज्ञानवर्धक संवाद के लिए उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी का हार्दिक आभार। 🙏
स्वस्थ मिट्टी • समृद्ध किसान • हरा-भरा झारखंड 🌾
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