दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित: झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030 को मिली प्रमुख मीडिया कवरेज

Dainik Hindustan Jharkhand edition coverage on Rajeev Singh and the Jharkhand Agriculture Export Roadmap 2030, highlighting Giridih potato export potential and farmer market linkages.

दैनिक हिन्दुस्तान | झारखंड संस्करण | 28 अगस्त 2026

Sansar Green के लिए यह गर्व का अवसर है कि Founder & Managing Director श्री राजीव सिंह द्वारा प्रस्तुत “Jharkhand Agriculture Export Roadmap–2030” को प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान ने अपने झारखंड संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया।

28 अगस्त 2026 को प्रकाशित समाचार “अब वैश्विक बाजार में चमकेगा गिरिडीह का आलू” में झारखंड के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाओं, गुणवत्ता मानकों, Farmer Producer Organisations (FPOs), प्रसंस्करण, आधुनिक भंडारण और निर्यात आधारित कृषि व्यवस्था पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।

यह मीडिया कवरेज 26 अगस्त 2026 को Krishi Bhavan, SAMETI, Ranchi में आयोजित कृषि निर्यात कार्यशाला से संबंधित है, जिसमें श्री राजीव सिंह ने झारखंड के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों एवं कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों के समक्ष Jharkhand Agriculture Export Roadmap–2030 प्रस्तुत किया था।

गिरिडीह के आलू से वैश्विक बाजार तक

दैनिक हिन्दुस्तान ने अपनी रिपोर्ट में विशेष रूप से गिरिडीह के आलू की निर्यात क्षमता को रेखांकित किया।

समाचार में बताया गया कि यदि वैज्ञानिक खेती, उन्नत किस्मों, बेहतर ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, आधुनिक भंडारण और प्रभावी कोल्ड-चेन व्यवस्था को मजबूत किया जाए, तो गिरिडीह का आलू वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना सकता है।

यह विचार Sansar Green की उस व्यापक सोच से जुड़ा है, जिसके अंतर्गत स्थानीय कृषि उत्पादों को केवल पारंपरिक मंडियों तक सीमित न रखकर उन्हें value-added, quality-driven और export-ready products के रूप में विकसित करने पर बल दिया जा रहा है।

गुणवत्ता मानकों पर विशेष जोर

समाचार में कार्यशाला के दौरान गुणवत्ता मानकों पर हुई चर्चा को भी प्रमुख स्थान दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने के लिए केवल अधिक उत्पादन पर्याप्त नहीं है। किसानों और FPOs को बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन के साथ-साथ निम्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना होगा:

  • गुणवत्ता और मानकीकरण
  • वैज्ञानिक ग्रेडिंग
  • आधुनिक पैकेजिंग
  • प्रसंस्करण
  • सुरक्षित भंडारण
  • कोल्ड-चेन
  • आवश्यक प्रमाणन
  • निर्यात दस्तावेज
  • बाजार आधारित उत्पादन योजना

Sansar Green का मानना है कि यदि किसान उत्पादन के साथ बाजार की जरूरतों को समझें, तो कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय में बदला जा सकता है।

Rajeev Singh ने प्रस्तुत किया Agriculture Export Roadmap–2030

दैनिक हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में गिरिडीह निवासी एवं Sansar Green के Founder & Managing Director Rajeev Singh द्वारा प्रस्तुत Jharkhand Agriculture Export Roadmap–2030 का उल्लेख किया गया।

इस रोडमैप के माध्यम से राज्य के प्रमुख कृषि उत्पादों की पहचान कर उन्हें संभावित निर्यात उत्पादों के रूप में विकसित करने की रणनीति प्रस्तुत की गई।

विशेष रूप से झारखंड के:

आलू • इमली • महुआ • आम • हल्दी • मिर्च • टमाटर

जैसे उत्पादों में निर्यात और value addition की महत्वपूर्ण संभावनाएं बताई गईं।

किसानों की आय और कृषि निर्यात पर जोर

Jharkhand Agriculture Export Roadmap–2030 का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि को बाजार से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना है।

यदि किसान अपनी उपज केवल कच्चे रूप में बेचने के बजाय उसे ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग के माध्यम से बाजार तक पहुंचाते हैं, तो उसके आर्थिक मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में:

Processing • Packaging • Storage • Logistics • Marketing • Agri Entrepreneurship

जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

FPOs बन सकते हैं कृषि निर्यात की मजबूत कड़ी

मीडिया रिपोर्ट में Farmer Producer Organisations की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

FPOs छोटे और सीमांत किसानों को संगठित कर उनकी उपज का सामूहिक संग्रह, गुणवत्ता परीक्षण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन सुनिश्चित कर सकते हैं।

इससे किसानों की bargaining power मजबूत होती है और वे सीधे बड़े खरीदारों, प्रसंस्करण कंपनियों तथा निर्यातकों से जुड़ सकते हैं।

Sansar Green की दृष्टि में FPOs भविष्य में Farmer-to-Market और Farmer-to-Export मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।

स्थानीय उत्पादों से बनेगा नया कृषि उद्यमिता मॉडल

समाचार में यह भी रेखांकित किया गया कि झारखंड के स्थानीय उत्पाद यदि संगठित खरीद, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन प्रणाली से जुड़े, तो इससे केवल किसानों को बेहतर मूल्य ही नहीं मिलेगा बल्कि कृषि उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।

इस मॉडल में किसानों के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं, FPOs, processors, logistics providers और agri-entrepreneurs के लिए भी नई संभावनाएं मौजूद हैं।

Sansar Green के लिए महत्वपूर्ण मीडिया मान्यता

दैनिक हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख समाचार पत्र द्वारा Jharkhand Agriculture Export Roadmap–2030 और Rajeev Singh के विचारों को स्थान दिया जाना Sansar Green के लिए एक महत्वपूर्ण मीडिया और संस्थागत उपलब्धि है।

यह कवरेज उस व्यापक उद्देश्य को आगे बढ़ाता है, जिसके तहत Sansar Green झारखंड की कृषि को production-oriented farming से market-oriented और value-added agriculture की दिशा में आगे ले जाने की वकालत कर रहा है।

हमारा विश्वास है कि झारखंड के किसानों को वैज्ञानिक उत्पादन, गुणवत्ता, तकनीक, FPO नेटवर्क, आधुनिक प्रसंस्करण और मजबूत बाजार संपर्क से जोड़कर राज्य के कृषि उत्पादों को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाई जा सकती है।

Local Farms to Global Markets

Sansar Green का दीर्घकालिक उद्देश्य स्पष्ट है — झारखंड के विशिष्ट कृषि उत्पादों की पहचान कर उनकी गुणवत्ता, processing, branding और market linkage को मजबूत करना ताकि किसान बड़े बाजारों से जुड़ सकें और उन्हें अपनी उपज का बेहतर आर्थिक मूल्य प्राप्त हो।

गिरिडीह के खेत से वैश्विक बाजार तक — यही Jharkhand Agriculture Export Roadmap–2030 की दिशा है।

प्रकाशन: दैनिक हिन्दुस्तान
संस्करण: झारखंड
प्रकाशन तिथि: 28 अगस्त 2026
समाचार शीर्षक: अब वैश्विक बाजार में चमकेगा गिरिडीह का आलू
संबंधित कार्यक्रम: Agriculture Export Workshop, Krishi Bhavan, SAMETI, Ranchi
कार्यक्रम तिथि: 26 अगस्त 2026